Breast Cancer Symptoms in Hindi | स्तन कैंसर के लक्षण हिंदी में

 ब्रैस्ट कैंसर क्यों होता हैं?

ब्रैस्ट कैंसर के होने के कई कारण हो सकते हैं। इसका अध्ययन अभी भी चल रहा है और वैज्ञानिकों ने कई कारकों को खोजा है। निम्नलिखित कारणों में से कुछ महत्वपूर्ण हैं: 

1. अधिक आयु: बढ़ती उम्र एक मुख्य ब्रैस्ट कैंसर कारक है। ज्यादातर महिलाओं को 50 वर्ष से अधिक उम्र में ब्रैस्ट कैंसर डायग्नोस्ट किया जाता है। 

2. रसौलीय परिवार: यदि आपके परिवार में पहले से ही किसी महिला को ब्रैस्ट कैंसर था, तो आपके ब्रैस्ट कैंसर के होने का खतरा बढ़ जाता है।


 3. अल्पकालिक और द्विघाटक हॉर्मोन उपयोग: हॉर्मोन थेरेपी, गर्भनिरोधक गोली और ब्रैस्ट कैंसर के इलाज के लिए कुछ दवाओं का उपयोग करने से ब्रैस्ट कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

4. महिलाओं में हॉर्मोनल परिवर्तन: मासिक धर्म, गर्भावस्था, स्तनपान, और मानोपैथिक थेरेपी जैसे हॉर्मोनल परिवर्तन ब्रैस्ट कैंसर के लिए एक कारक हो सकते हैं।

 5. वजन: अतिरिक्त वजन और मोटापा ब्रैस्ट कैंसर के खतरे को बढ़ा सकते हैं।

 6. अल्कोहल: अधिक मात्रा में अल्कोहल का सेवन करने से ब्रैस्ट कैंसर का खतरा बढ़ता हैं। 

7. धूम्रपान: धूम्रपान करने वाली महिलाओं में ब्रैस्ट कैंसर का खतरा बढ़ जाता हैं।

ब्रैस्ट कैंसर के अलावा भी कई अन्य कारण हो सकते हैं, इसलिए यह महत्वपूर्ण हैं कि आप नियमित चेकअप और स्क्रीनिंग करवाएं ताकि कैंसर के शुरुआती लक्षणों को जल्दी पहचाना जा सके।

स्तन कैंसर के लक्षण:

1. स्तनों में गांठ का उत्पादन।

 2. स्तनों में दर्द या तनाव का अनुभव। 

3. स्तनों की त्वचा के रंग या चिपचिपाहट में परिवर्तन।

 4. त्वचा पर घाव, चकत्ते या खुजली का दिखाई देना। 

5. स्तनों से श्वेत या पीली धुंधली शर्करा या रेशा का निकलना।

 6. स्तनों में आकार में बदलाव या आकार के विशेष इलाकों का महसूस होना।

 7. स्तनों की निप्पल्स में घूंघराला या अंधेरा हो जाना। 

8. असामान्य स्तन की स्तरियां, गूदा, या ब्रैस्ट की तापमान में बदलाव। 

यदि आपको ये लक्षण दिखाई देते हैं, तो कृपया तत्काल चिकित्सा पेशेवर की सलाह लें। स्वस्थ्य जीवनशैली अपनाना और नियमित स्वास्थ्य जांच करवाना भी महत्वपूर्ण है।

कौन सी उम्र में ब्रैस्ट कैंसर होताहै?

ब्रैस्ट कैंसर किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन इसका खतरा उम्र के साथ बढ़ता है। यहां ब्रैस्ट कैंसर के होने की आम उम्र वर्गीकरण है:

1. 40 से 49 वर्ष: इस आयु समूह में ब्रैस्ट कैंसर का आमतौर पर संक्रमण होता है। यहां स्तनों के स्वास्थ्य की निगरानी करना और स्क्रीनिंग टेस्ट करवाना महत्वपूर्ण है।

 2. 50 से 69 वर्ष: यह उम्र वर्ग महिलाओं के लिए सबसे अधिक ब्रैस्ट कैंसर के लिए खतरनाक होता है। रेगुलर स्क्रीनिंग टेस्ट जैसे मैमोग्राम और क्लिनिकल ब्रैस्ट एग्जामिनेशन करवाना इस उम्र में बहुत महत्वपूर्ण होता है। 

3. 70 से 84 वर्ष: यह आयु समूह भी ब्रैस्ट कैंसर के लिए खतरनाक होता है। अधिकांश महिलाएं इस उम्र में स्क्रीनिंग के लिए निर्धारित नहीं होती हैं, लेकिन यदि वे संदिग्धता या लक्षणों को अनुभव करती हैं, तो वे चिकित्सा पेशेवर से सलाह ले सकती हैं। ब्रैस्ट कैंसर के अलावा भी, हर उम्र में अपने स्तनों के स्वास्थ्य का ध्यान रखना महत्वपूर्ण है। नियमित चेकअप और स्वास्थ्य जांच करवाना सुनिश्चित करें।

क्या ब्रैस्ट कैंसर खतरनाक होता हैं? 

हाँ, ब्रैस्ट कैंसर खतरनाक हो सकता हैं। यह महिलाओं में सबसे आम तरीके से पाया जाने वाला कैंसर हैं और यह अनियंत्रित शर्करा का विकास करता हैं जो स्तनों की समस्या पैदा कर सकता हैं। अगर यह समय पर निर्धारित नहीं होता हैं तो यह और अधिक परेशानी का कारण बन सकता हैं। ब्रैस्ट कैंसर के खतरे को निम्नलिखित कारकों से प्रभावित किया जा सकता हैं:

 1. अधिक उम्र: बढ़ती उम्र ब्रैस्ट कैंसर के लिए एक महत्वपूर्ण कारक हैं। 

2. परिवार में संबंध: अगर परिवार में पहले से ही किसी महिला को ब्रैस्ट कैंसर हुआ हैं तो आपका खतरा बढ़ सकता हैं।

 3. अतिरिक्त वजन: मोटापा और अतिरिक्त वजन ब्रैस्ट कैंसर के खतरे को बढ़ा सकता हैं। 

4. हॉर्मोन थेरेपी: हॉर्मोन थेरेपी या गर्भनिरोधक गोलियाँ लेने से भी ब्रैस्ट कैंसर का खतरा बढ़ सकता हैं। यदि आपको ब्रैस्ट कैंसर के संबंध में संकेत मिलते हैं, तो शीघ्रता से चिकित्सा सलाह लें और अपने चिकित्सक के साथ संपर्क में रहें। समय रहते इसे पहचानने और उपचार करने में बहुत महत्वपूर्ण होता हैं।

ब्रैस्ट कैंसर के विभिन्न प्रकार होते हैं

 निम्नलिखित हैं ब्रैस्ट कैंसर के कुछ प्रमुख प्रकार:

 1. इंवेसिव डक्टल कैंसर: यह सबसे सामान्य और प्रमुख प्रकार हैं, जिसमें कैंसर के कोशिकाओं ने स्तन के डक्टों में इंवेशन किया होता हैं। 

2. इंवेसिव लोबुलर कैंसर: इस प्रकार के कैंसर में कैंसर के कोशिकाएं स्तन के लोबुलेस में इंवेशन करती हैं, जो स्तन की दुसरी अंग्रेजी कहावत होते हैं।

 3. अवांसिय और स्थानिक कैंसर: इस प्रकार के कैंसर में कैंसर के कोशिकाएं स्तन के बाहर अवांसित हो जाती हैं और आस-पास के ऊतकों तक फैल जाती हैं।

 4. पेशी कैंसर: यह कैंसर स्तन के मांसपेशियों में उत्पन्न होता हैं। 

5. रेयो नॉडल कैंसर: इसमें कैंसर की विकसित होने की आरंभिक अवस्था स्तन के रेयो नॉड में होती हैं, जो कैंसर के पहले वर्ष में पाया जा सकता हैं। यहाँ दिए गए प्रकारों के अलावा भी अन्य प्रकार के ब्रैस्ट कैंसर हो सकते हैं। हर प्रकार का ब्रैस्ट कैंसर अपनी विशेषताओं और उपचार के लिए अलग होता हैं।

क्या स्तन कैंसर का संक्रमण शरीर के अन्य अंगों में भी फैल सकता है?

नहीं, ब्रैस्ट कैंसर के संक्रमण का प्रभाव सिर्फ स्तन पर होता है और यह दूसरे शरीर के अंगों में फैल नहीं सकता है। ब्रैस्ट कैंसर के इलाज में उपयोग होने वाले इंजेक्शन और दवाएं विशेष रूप से स्तन कैंसर के खिलाफ लड़ाई लड़ने में मदद करते हैं, जैसे कि टारगेटेड थेरेपी और रेडियोथेरेपी आदि। यदि किसी महिला को ब्रैस्ट कैंसर का संदेह है या उसे इस समस्या से पीड़ित होने की संभावना है, तो उसे तत्काल चिकित्सा सलाह लेनी चाहिए। एक अनुभवी चिकित्सक के मार्गदर्शन में उचित जांच और ट्रीटमेंट स्केड्यूल के अनुसार उपचार करवाना चाहिए।

स्तन कैंसर के शुरुआती लक्षण :

1. स्तनों में गांठ या गुटनी: गांठ की तरह जिसमें स्तन की ऊतकों में परिवर्तन हो, या गुटनी की तरह जो स्तन में निगल जाती है।

 2. त्वचा पर परिवर्तन: स्तन के ऊतकों में कुछ बदलाव होने से त्वचा दिखने में झिल्ली या खिसक जाती है। 

3. निप्पल से रसायनिक स्राव: स्तन के निप्पल से कोई अनियमित रसायनिक स्राव होना। 

4. स्तन में दर्द या दबाव: आम तौर पर स्तन में दर्द या दबाव महसूस होना।

 5. स्तनों के आकार में बदलाव: स्तनों के आकार में अनियमितता दिखाई देना। 

6. त्वचा की लालिमा: स्तन की त्वचा पर लाल या सूजन होना।

 यह लक्षण ब्रैस्ट कैंसर के हो सकते हैं, लेकिन सभी स्त्रियों में इन लक्षणों का होना ब्रैस्ट कैंसर की निश्चित पुष्टि नहीं करता है। इसलिए, यदि आपको इन लक्षणों का सामना है, तो आपको तत्काल एक चिकित्सक से संपर्क करके जांच करवानी चाहिए। समय पर जांच होने से ब्रैस्ट कैंसर के निदान और उपचार की संभावना बढ़ जाती है।

मुख्य बिंदु जो स्तन कैंसर का कारण बनते हैं ?

1. अधिक शराब और धूम्रपान: अधिक मात्रा में शराब पीना और धूम्रपान करना ब्रैस्ट कैंसर के विकास के लिए एक कारक हो सकता है। 

2. पारिवारिक इतिहास: परिवार में किसी सदस्य को पहले से ब्रैस्ट कैंसर का संबंध होना भी आपके ब्रैस्ट कैंसर के खतरे को बढ़ा सकता है। 

3. वजन बढ़ना: ज्यादा वजन रखने से भी ब्रैस्ट कैंसर के प्रति संवेदनशीलता बढ़ सकती है। 

4. शारीरिक निष्क्रियता: नियमित शारीरिक गतिविधियों की कमी भी ब्रैस्ट कैंसर के खतरे को बढ़ा सकती है।

 5. दुष्प्रभावी दवाएं: कुछ दवाओं का नियमित उपयोग करने से भी ब्रैस्ट कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

 6. प्रदूषण और वायु प्रदूषण: वायु और जल के प्रदूषण तत्व भी ब्रैस्ट कैंसर के विकास में योगदान कर सकते हैं। 

7. रडिएशन और केमोथेरेपी: पूर्वी इलाज में उपयोग होने वाले रडिएशन और केमोथेरेपी के बारे में भी विचार किया जाना चाहिए, क्योंकि ये ब्रैस्ट कैंसर के खतरे को प्रभावित कर सकते हैं।

8. वसा जमा होना: अधिक मात्रा में शरीर में वसा जमा होने से ब्रैस्ट कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।  

9. बीमारियां और दवाएं: कुछ बीमारियां और दवाएं भी ब्रैस्ट कैंसर के उत्पन्न होने में योगदान कर सकती हैं।

ब्रैस्ट कैंसर का निदान कैसे होता है: 

1. जाँच (Physical Examination): ब्रैस्ट कैंसर का पहला चरण होता है स्तनों की जाँच, जिसमें चिकित्सक स्तनों को हाथों से महसूस करके गांठें, गुटनी या दर्द का पता लगाते हैं।

 2. मैमोग्राफी (Mammography): मैमोग्राफी एक रेंटगन तकनीक है जिसमें स्तनों का X-ray लेकर कैंसर या अन्य गांठों का पता लगाया जाता है। 

3. उल्ट्रासोनोग्राफी (Ultrasound): यह तकनीक उल्ट्रासोनिक तरंगों का उपयोग करके स्तनों के अंदरीय रूप से गांठों का पता लगाने के लिए किया जाता है। 

4. स्टीरियोटैक्टिक बायोप्सी (Stereotactic Biopsy): जब जांचों में कोई संशयजनक गांठ मिलती है, तो यह बायोप्सी टेक्निक के जरिए उस गांठ से सैंपल निकालने के लिए किया जाता है। 

5. एक्स-रे एवं कॉम्प्यूटरीकरण टोमोग्राफी (CT Scan): यह तकनीक विस्तारपूर्वक चित्रण करके शरीर के अंदरीय अंगों का एक तीसरा आयाम प्रदर्शित करती है, जिससे कैंसर के फैलाव का पता लगता है। 

6. मैग्नेटिक रेजनेंस इमेजिंग (MRI): एमआरआई विकासपूर्वक चित्रण करती है और विस्तारपूर्वक जांच करके कैंसर के प्रकार और स्थिति का पता लगाने में मदद करती है।

 7. बायोप्सी (Biopsy): बायोप्सी के द्वारा संशयजनक स्तन की समीक्षा की जाती है और उस समीक्षा के आधार पर विशेषज्ञ निदान लगाते हैं। यह सभी जांच और टेस्ट तत्काल एक चिकित्सक के मार्गदर्शन में किए जाते हैं और इनके आधार पर डॉक्टर निश्चित करता है कि क्या कैंसर का पुष्टि है और उसके उपचार की आवश्यकता है या नहीं।

ब्रैस्ट कैंसर के चरणों का विवरण:  

चरण 0: प्री-कैंसरस् निश्चित नहीं होता, इसमें शानदार जांच के बाद भी स्तन के तंत्रिका (ducts) में कुछ अशुद्धि होती है, जिसे नॉन-इन्वेजिव कैंसर के रूप में जाना जाता है। 

चरण I: इसमें छोटी से गांठ एक तंत्रिका (duct) से सीमित होती है और स्तन के बाह्य भाग से बाहर नहीं फैलती। 

चरण II: इसमें गांठ से तंत्रिका (duct) के बाह्य भाग तक फैलने लगती है, और कई बार अकारण गांठें भी हो सकती हैं। 

चरण III: इसमें कैंसर स्तन के निकटवर्ती लिम्फ नोड (lymph node) तक पहुंच जाता है, जिससे इसका विकास तेजी से होता है। 

चरण IV: इसमें कैंसर अन्य शरीर के अंगों में भी फैल जाता है, जिसे अस्थायी चिकित्सा नहीं संभावित किया जा सकता है। यह चरणों का विवरण सामान्य रूप से ब्रैस्ट कैंसर के विकास के अनुसार होता है। यह चरण एक प्रशासकीय विश्लेषण द्वारा ज्ञात होता है और चिकित्सा सलाहकार के द्वारा उचित उपचार का निर्धारण किया जाता है। ब्रैस्ट कैंसर के उपचार में अग्रणी तकनीकें हैं जैसे कि सर्जरी, रेडियोथेरेपी, केमोथेरेपी, और टारगेटेड थेरेपी आदि।

ब्रैस्ट कैंसर सर्जरी क्या है:

 ब्रैस्ट कैंसर सर्जरी एक चिकित्सा प्रक्रिया है जो स्तन के कैंसर को निकालने या कम करने के लिए की जाती है। इसमें कैंसर के प्रभावित अंग को या पूरा स्तन हटा दिया जा सकता है जो कैंसर के विकास के अनुसार निर्धारित किया जाता है। विभिन्न प्रकार की सर्जरी हो सकती है जैसे कि:

 1. स्तन संरक्षण सर्जरी: यह सर्जरी मात्र गांठ को निकालने के लिए की जाती है और स्तन के बचे हुए भाग को सुरक्षित रखने का प्रयास किया जाता है। 

2. स्तन की पूर्ण सर्जरी (मस्टेक्टोमी): इसमें पूरा स्तन हटा दिया जाता है, जिससे ब्रैस्ट कैंसर को पूरी तरह से निकाल दिया जाता है। 

3. स्तनों की पुनर्निर्माण सर्जरी: इसमें स्तन के गड्ढे को भरने या स्तन को पुनः निर्माण करने के लिए सर्जरी की जाती है। इन सभी सर्जरी प्रकारों में से एक को या उनके संयोजन को चिकित्सा सलाहकार द्वारा निर्धारित किया जाता है। इसके बाद, अनुभवी सर्जन इसका आयोजन करते हैं और सर्जरी का कारण, विधि, और स्थिति के अनुसार उपचार प्रदान करते हैं। सर्जरी के बाद, पूर्ण स्वास्थ्य पुनर्प्राप्ति के लिए उपचार और देखभाल भी अहम होते हैं।

होम्योपैथी दवाओं से ब्रैस्ट कैंसर का इलाज

होम्योपैथी दवाओं से ब्रैस्ट कैंसर का इलाज करने की विधि और प्रभाव को लेकर विशेषज्ञों के बीच अलग-अलग विचार हैं। होम्योपैथी चिकित्सा एक विशिष्ट प्रकार की प्राकृतिक चिकित्सा है, जिसमें शरीर के संतुलन को सुधारने का प्रयास किया जाता है। यह विभिन्न रोगों के इलाज में माध्यम बन सकती है, लेकिन ब्रैस्ट कैंसर के इलाज में इसकी प्रभावशीलता के बारे में पूरी तरह से नहीं कहा जा सकता है। ब्रैस्ट कैंसर के उपचार के लिए आमतौर पर सर्जरी, रेडियोथेरेपी, केमोथेरेपी, हॉर्मोन थेरेपी और टारगेटेड थेरेपी जैसे चिकित्सा तकनीकों का उपयोग किया जाता है। यह चिकित्सा सलाहकार द्वारा निर्धारित होता है, और इसमें निदान, कैंसर के चरण, रोगी की स्थिति, और अन्य चिकित्सा इतिहास को ध्यान में रखते हुए उचित उपचार का चयन किया जाता है। इसलिए, यदि किसी व्यक्ति को ब्रैस्ट कैंसर है, तो उन्हें केवल चिकित्सा सलाहकार के मार्गदर्शन में होम्योपैथी दवाओं का प्रयोग करना चाहिए। स्वास्थ्य सेवाओं के दृष्टिगत, ब्रैस्ट कैंसर का सही इलाज विशेषज्ञ चिकित्सा सलाहकार द्वारा ही किया जाना चाहिए।

संक्षेप में:

 ब्रैस्ट कैंसर एक गंभीर बीमारी है जो महिलाओं में होती है। इसके लक्षणों में स्तनों में गांठें, स्तन की त्वचा में बदलाव, दर्द या चिपचिपी निकलने वाली तरलता शामिल हो सकती हैं। यदि ऐसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना जरूरी है। ब्रैस्ट कैंसर के उपचार में स्तन संरक्षण सर्जरी, रेडियोथेरेपी, केमोथेरेपी, हॉर्मोन थेरेपी, और टारगेटेड थेरेपी जैसी तकनीकें का उपयोग किया जाता है। उचित उपचार का चयन और समय पर इलाज करवाना बहुत महत्वपूर्ण है ताकि संपूर्ण स्वास्थ्य पुनर्प्राप्ति हो सके। होम्योपैथी दवाओं का भी उपयोग ब्रैस्ट कैंसर के इलाज में विचार किया जा सकता है, लेकिन इसकी प्रभावशीलता के बारे में सही जानकारी नहीं होती है। इसलिए, होम्योपैथी दवाओं का उपयोग करने से पहले चिकित्सा सलाहकार से परामर्श करना जरूरी है। समय रहते ब्रैस्ट कैंसर के लक्षणों का पहचान करवाना और उचित उपचार करवाना बहुत महत्वपूर्ण है। नियमित स्क्रीनिंग और आरामदायक जीवनशैली अपनाने से ब्रैस्ट कैंसर के खतरे को कम किया जा सकता है। आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं और सही जागरूकता के साथ, ब्रैस्ट कैंसर का समय रहते पहचाना और इलाज किया जा सकता है, जिससे रोगी की जीवनगाथा बेहतर हो सकती है।

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